skip to Main Content
Yoga In Hindi-Shankh Prakshalan For Weight Loss & Benefits.

Yoga in Hindi-Shankh Prakshalan For Weight Loss & Benefits.

शंख प्रक्षालन के लाभ । Yoga in Hindi । Shankh Prakshalan For Weight Loss & Benefits.

 

Yoga In Hindi- शंख प्रक्षालन के लाभ । Yoga in Hindi । Shankh Prakshalan For Weight Loss & Benefits – समस्त उदर रोग, मोटापा, बवासीर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धतुरोग आदि कोई ऐसा रोग नहीं, जिसमें इस क्रिया से लाभ न होता हो।

शंख प्रक्षालन छुट्टि के दिन करना चाहिये और उस दिन पूर्ण शारीरिक एवं मान्सिक विश्राम करें।

Yoga In Hindiwww.yogaforwellness.inshankha prakshalana benefits in hindi.

 

शंख प्रक्षालन या शंख धौति:

 

हमारी आँत की आकृति शंखाकार है। उस शंखाकार आँत का प्रक्षालन होना (शुद्ध करना) ही ‘शंख प्रक्षालन’ या ‘वारिसार’क्रिया कहलाता है। इस क्रिया का हमने अनेक रोगी व्यक्तियों पर परीक्षण किया और पाया है कि इस क्रिया से व्यक्ति का वास्तव में कायाकल्प हो जाता है।

 

हमारा शरीर एक यंत्र जैसा है। अतः जैसे हमलोग सारे यंत्रों, मशीनों की पूरी साफ-सफाई एवं मरम्मत करवाते है। जिससे ये सारे यंत्र व मशीनें सही तरीके से कार्य करते रहे।

उसी प्रकार हमें अपने शरीर रुपी यंत्र की साफ-सफाई करते रहना चाहिए। जिससे हमारा शरीर स्वस्थ, तंदरुस्त व बलिष्ठ बना रहे।

हम जिस प्रकार प्रतिदिन अपने कपड़ों व शरीर को धोते व साफ करते है। हम प्रतिदिन अपने वस्त्रों को साफ करते हैं। यदि एक दिन भी वस्त्र नहीं धोए जाएँ तो वस्त्र मैले हो जाते हैं। उसी प्रकार हमारे शरीर के अंदर 32 फ़ीट लंबी आंत होती है।

इसके साफ-सफाई का हमलोग ध्यान नहीं देते है। जिसके कारण आंत के दीवारों पर सूक्ष्म मल की परत बनती चली जाती है। जिसके कारण हमारे शरीर के अंदर विषाक्त बढ़ने लगता है।

उस पर्त के जम जाने से रसों के अवशोषण व निष्कासन (परित्याग) की जो ठीक-ठीक क्रिया होनी चाहिए, वह नहीं हो पाती है।

जिसके कारण हमारे शरीर के अंदर विषाक्त बढ़ने लगता है।

जिससे मन्दाग्नि, अपच, खट्टी डकारें आना आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। मल के सड़ने से पेट में दुर्गन्ध् हो जाती है।

गैस्टिक की बीमारी हो जाती है। रस का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता।

जब मुख्य यन्त्र ही विकृत हो जाता है तब सहायक यन्त्र आमाशय, अग्न्याशय (पेन्क्रियाज) आदि भी प्रभावित हो जाते हैं और विविध प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

जिसके कारण हम बीमारियों के प्रभाव में आ जाते है।

 

Read More : BENEFITS OF SARVANGASANA.

Yoga In Hindi- शंख प्रक्षालन के लाभ । Shankha Prakshalana Benefits In Hindi

 

शंख प्रक्षालन क्रिया को करने से पूर्व तैयारी :

 

Shankha Prakshalanaशंख प्रक्षालन क्रिया को करने से पहले कम से कम एक सप्ताह पूर्व ही आसनों का अभ्यास प्रारम्भ कर देना चाहिए।

जिस दिन शंख प्रक्षालन करना हो उससे पूर्व रात्रि को सुपाच्य हल्का भोजन लगभग 8 बजे तक कर लेना चाहिए।

सायंकाल दूध में लगभग 50 से 100 ग्राम तक मुनक्का डालकर पी लें तो शुद्धि की क्रिया अति उत्तम होती है।

रात्रि को 10 बजे से पूर्व रात्रि को सो जाएँ।

 

लघु शंखप्रक्षालन को सही तरीके से करने पर हमारे शरीर के अंदर के सारे विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते है।

यह शरीर को शुद्ध करने का आसान व सही तरीका है।

 

शंख प्रक्षालन क्रिया हेतु आवश्यक सामग्री :

 

एक ग्लास (पानी पीने के लिए), गुनगुना पानी, जिसमें उचित परिमाण में नींबू का रस एवं सैंधा नमक डला हुआ हो।

चावल व मूँगदाल की पतली खिचड़ी, प्रति व्यक्ति के हिसाब से

लगभग 100-200 ग्राम गाय का घी, गाय का घी।

आसन करने हेतु दरी या कम्बल, ओढ़ने हेतु हल्की चादर तथा पास में ही शौचालय हो।

 

तीन प्रकार का जल :

 

(1)  उच्च रक्तचाप तथा चर्म रोगियों के लिए :

जिन लोगों को उच्च रक्तचाप या चर्म रोग हो, उनको नींबू रस मिला हुआ गर्म जल पीकर ही यह क्रिया करनी चाहिए।

(2)  नींबू तथा सैंधा नमक वाला :

पानी में उचित परिमाण में नींबू व सैंधा नमक मिलाकर गर्म पानी तैयार करें। यह पानी वात, कफ एव उच्च रक्तचाप के रोगियों को छोड़कर शेष सभी स्वस्थ व्यक्तियों को पीना होता है।

(3)  वात तथा कफ रोगियों के लिए :

जोड़ों में दर्द, आमवात (गठिया), सूजन, सर्वाइकल, स्पोंडोलाइटिस, स्लिपडिस्क आदि किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा तथा कफ रोग हो तो उनको केवल सैंधा नमक मिला हुआ गर्म पानी पीना चाहिए।

 

शंखप्रक्षालन हेतु जो पाँच आसन हैं…

1.ताड़ासन
2.तिर्यक ताड़ासन
3.कटिचक्रासन
4.तिर्यक शशांक भुजंगासन
5.उदराकर्षासन या शंखासन

 

Yoga In Hindi- शंख प्रक्षालन के लाभ । Shankh Prakshalan For Weight Loss & Benefits

 

शंख प्रक्षालन क्रिया को करने की विधि:

 

प्रातः काल नित्यकर्म स्नान, मंजन व शौच आदि से, यदि सम्भव हो तो, निवृत्त हो जाएँ।

यदि शौच न भी हो, तो कोई बात नहीं। नमक मिलाकर गर्म पानी तैयार करें, पानी में नमक उतना ही हो जितना दाल में नमक होता है।

तैयार किए हुए यथानिर्दिष्ट पानी के एक या दो ग्लास उत्कटासन में (उकडूँ) बैठकर बिना स्वाद लिए जल्दी से पी जाइए।

शंख प्रक्षालन के निर्धारित पाँचों आसनों की दो आवृत्ति करके, इच्छानुसार पानी पिएँ।

पानी पीकर पुनः क्रमशः आसन करें। इस प्रकार दो-तीन बार पानी पीते रहने और आसन करते रहने से शौच आना आरम्भ हो जाएगा।

शौचालय में अधिक देर तक जोर लगाकर शौच करने की चेष्टा न करें। शौच जितना हो जाता है, उतना करें।

शौचालय में बैठकर अश्विनी मुद्रा (गुदाभाग को खींचना और छोड़ना करें) इससे पेट ठीक प्रकार से साफ होगा तथा बवासीर आदि रोग भी नष्ट होंगे।

शौच से आने के बाद फिर पानी पिएँ और आसन करें। इस प्रकार, पानी

पीकर आसन करते जाएँ तथा शौच जाते रहें। जब 8-10 बार शौचालय जाएँगे, तब आप देखेंगे कि अब

पीला पानी आना बन्द हो गया है। जैसा पानी आप पी रहे हैं वैसा ही पानी गुदा भाग से निकल रहा है।

तब 4-5 गिलास या स्वेच्छापूर्वक यथेष्ट जल पीकर वमन धैति कर लें।

वमन धैति करने के पश्चात्‌ 30-40 मिनट शवासन में लेटकर विश्राम करें।

शरीर को हल्के कपड़े से ढँककर रखें, क्योंकि इस समय अधिक वायु भी शरीर को नहीं लगनी चाहिए।

30-40 मिनट विश्राम करके छिलका वाली मूँगदाल व चावल समान मात्रा में मिलाकर बनाई हुई-पतली

खिचड़ी में गर्म किया हुआ यथेष्ट घी डालकर खाएँ। कम से कम 50 ग्राम घी तो खा ही लेना चाहिए, लेकिन

स्वस्थ व्यक्ति यथाशक्ति जितनी इच्छा हो खाएँ।

 

इस क्रिया से सम्पूर्ण शरीर की शुद्धि हो जाती है।

शुद्धि करने के पश्चात्‌ जैसे गाड़ियों में ग्रिसिंग कराते हैं, वैसे ही शरीर में ग्रिसिंग करना चाहिए। इस क्रिया के

पश्चात् जो घी खाया जाता है, उससे आँत आदि सभी ग्रन्थियाँ कोमल हो जाती हैं।

जब उन पर घी लग जाता है, तो मल आदि उनसे दुबारा नहीं चिपकते। इस समय खाए गए घी से किसी भी रोगी को कोई हानि नहीं  होती।

खिचड़ी खाकर संभव हो तो योग निद्रा करें। योग निद्रा शवासन के तुल्य होती है।

 

More Read :  उत्तानपादासन करने की विधि और लाभ। 

 

शंख प्रक्षालन 

Yoga In Hindi- शंख प्रक्षालन के लाभ । Shankha Prakshalana Benefits In Hindi – कायाकल्प की विधियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिस प्रकार शंख प्रक्षालन में पानी शंख में से घूम-घूम कर धीरे-धीरे बाहर निकलता है।

उसी प्रकार इस क्रिया में पानी आमाशय, आंतों और मलाशय से होकर गुदा मार्ग से बाहर निकलता है और शरीर को अन्दर से पूर्णतया शुद्ध कर देता है।

 

शंख प्रक्षालन की सावधानियां:

शंख प्रक्षालन की सावधानियों को जानना बहुत ही जरूरी है और हमेशा ध्यान रहे इस योग क्रिया को किसी योग विशेषज्ञ के सामंने करनी चाहिए। विशेषज्ञ के द्वारा बताये गई बातों का पालन करनी चाहिए।

  • शंखप्रक्षालन क्रिया के बाद खाली पेट नहीं रहनी चाहिए।
  • इस योग क्रिया समाप्त होने के बाद 1 घंटे के भीतर भोजन ग्रहण करें।
  • मूंग की दाल की खिचड़ी घी के साथ लेना उपयुक्त होगा।
  • खिचड़ी खाने के दो घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं-पिएं।
  • यह योग क्रिया के बाद आपको गर्म पानी से नहान चाहिए, ठंडे पानी का उपयोग नहाने में एकदम नहीं करनी चाहिए।   Yoga In Hindi- शंख प्रक्षालन के लाभ । Shankh Prakshalan For Weight Loss & Benefits
  • शरीर को ठंडी हवा से बचाने के लिए तुरंत नहाने के बाद शरीर पर वस्त्र रखें।
  • कूलर या एयर कंडीशनर का प्रयोग न करें।
  • काली मिर्च, सिरका तथा खट्टे पदार्थ लेने से बचें।
  • इस क्रिया के उपरांत 24 घंटे तक दूध और दही न लें।
  • अत्यधिक ठंडे अथवा बादलों वाले दिन शंखप्रक्षालन नहीं करनी चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप, हर्निया, मिर्गी, हृदय रोग तथा बवासीर के रोगियों को यह क्रिया नहीं करनी चाहिए।
  • जो व्यक्ति सावधानियां बरतने में असमर्थ हों उन्हें शंख प्रक्षालन नहीं करना चाहिए।
  • गंभीर रोगों से ग्रसित रोगी तथा गर्भवती महिलायें बिना चिकित्सक की सलाह के न करें।

 

Read More : त्रिकोणासन करने की विधि और लाभ। 

 

शंख प्रक्षालन के लाभ:

 

  • पाचन तंत्र के शुद्धिकरण एवं विषैले तत्वों से बचाने के लिए यह क्रिया अत्यधिक प्रभावी है।
  • शंख प्रक्षालन अपच गैस एसीडिटी एवं कब्ज के लिए रामबाण है।
  • यह शोधन क्रिया आंतों को सामान्य कार्य करने योग्य बनाती है।
  • डाइबिटीज मोटापा उच्च कोलेस्ट्राल एवं उच्च लिपिड की अवस्था को ठीक करने में उपयोगी है।
  • आंतों में गंदगी जमने और उसको सही तरीके से साफ करने के लिए यह अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास है।
  • माहवारी की पीड़ा, दमा, मुंहासों तथा छालों से मुक्ति दिलाती है।
  • एलर्जी आदि में अत्यधिक उपयोगी है।
  • यह मूत्र संबंधी संक्रमण तथा गुर्दे में पथरी होने से रोकती है।
  • यदि उपवास या आंशिक उपवास किया जाए तो इस क्रिया के लाभ बढ़ जाते हैं।
  • अस्थमा पुराना जुकाम एक्जिमा एवं सोराइसिस ठीक होते हैं गठिया और पुरानी इनफ्लेमेटरी बीमारियां ठीक होती हैं।
  • फ़ास्ट फूड्स, सुस्त जीवनशैली अथवा अंगों के ठीक से काम नहीं करने के कारण आंतों की प्राकृतिक सफाई नहीं हो पाती है इस स्थिति में यह आंतों की गड़बड़ी दूर करती है।
  • शंखप्रक्षालन क्रिया से मस्तिष्क की काम करने की ताकत बढ़ जाती है और आदमी में तरो ताजगी आ जाती है।

 

योग हमारा शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के विकास में सहायक होता है। अतः आप प्रशिक्षित योग शिक्षक के सानिध्य में ही योग का सही अभ्यास करें।

अगर आपको यह लेख उपयोगी लगता है तो कृपया इस लेख को नीचे दिए गए बटन को दबाकर Share करें।

Back To Top